MA4 Gun Butter Theory
उपर्युक्त रेखा चित्र में वैकल्पिक उत्पादन संभावनाओं का एक मॉडल बनाया गया है जो कि काल्पनिक है इस मॉडल में या कल्पना की गई है कि किसी भी देश में उपलब्ध सैन्य संसाधनों का एक अंतिम चरण बिंदु होता है खड़ी रेखाएं द्वारा यह माना गया है कि किसी भी देश का संपूर्ण संसाधन नागरिक उपभोग की सभी वस्तुओं का उत्पादन केवल 40 तक कर सकता है इसके विपरीत उसी संसाधन को यदि सैन्य संबंधी कार्य के लिए 12 होगा जोकि पड़ी रेखा द्वारा प्रदर्शित किया गया है यदि कोई देश केवल जनकल्याण की वस्तुओं का उत्पादन करें तो रक्षा उत्पादन शुरू हो जाएगा जोकि खड़ी खड़ी रेखाओं के जोड़ने वाले बिंदु पर प्रदर्शित किया गया है इसके विपरीत यदि कोई राष्ट्र यदि केवल सैनिक उत्पादन करने में लेता है तो जनकल्याण की वस्तुओं का उत्पादन जीरो हो जाएगा यह दोनों प्रकार की वस्तुओं का चरम स्तर है किंतु यदि राष्ट्र दोनों ही प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन करना चाहता है तो एक में कटौती करके दूसरे का उत्पादन करना होगा जैसा कि आरेख में मॉडल के ऊपर पॉइंट B है इसका तात्पर्य है कि राष्ट्र में जन कल्याण के उत्पादन के लिए 10 अंक की कटौती कर दिया तो रक्षा उत्पादन में 3 वस्तुओं का उत्पादन हो जाएगा
इसी तरह जन कल्याण में कटौती करने करण सा रक्षा की वस्तुओं का उत्पादन बढ़ता जाएगा जैसा कि आरेख के मॉडल पर बिंदु aoe प्रदर्शित किया गया है
गन वटर परिकल्पना उत्पादन के क्षेत्र में प्रत्येक वस्तु के उत्पादन की एक अवसर लागत होती है अपॉर्चुनिटी कॉस्ट इसका तात्पर्य है कि हम अपने उपलब्ध संसाधनों से जब किसी वस्तु का उत्पादन कर देते हैं तो किसी अन्य वस्तु के उत्पादन का अवसर खो देते हैं अर्थशास्त्र के इसी मूल सिद्धांत का सहारा लेते हुए पश्चिमी देशों के कुछ अर्थशास्त्रियों ने रक्षा के क्षेत्र में किए जाने वाले व्यय को गैर उत्पादक और जनकल्याण के उपभोग की वस्तु में कटौती करना निरूपित किया जिसे उन्होंने अन्य भाषा में गनबटर थ्योरी नाम दिया है
गन वटर परिकल्पना उत्पादन के क्षेत्र में प्रत्येक वस्तु के उत्पादन की एक अवसर लागत होती है अपॉर्चुनिटी कॉस्ट इसका तात्पर्य है कि हम अपने उपलब्ध संसाधनों से जब किसी वस्तु का उत्पादन कर देते हैं तो किसी अन्य वस्तु के उत्पादन का अवसर खो देते हैं अर्थशास्त्र के इसी मूल सिद्धांत का सहारा लेते हुए पश्चिमी देशों के कुछ अर्थशास्त्रियों ने रक्षा के क्षेत्र में किए जाने वाले व्यय को गैर उत्पादक और जनकल्याण के उपभोग की वस्तु में कटौती करना निरूपित किया जिसे उन्होंने अन्य भाषा में गनबटर थ्योरी नाम दिया है

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