peace and development are contradictory to each other
विश्व में ऐसे विशेषज्ञ हुए हैं जिन्होंने युद्ध को समाज कल्याण के लिए उपयोगी बताया है उनका कहना है की जितना विकास युद्ध काल में हो जाता है उतना विकास शांति काल में करना संभव नहीं होता है इसलिए देशों को युद्ध की स्थिति बनाए रखनी चाहिए
बहुत सारे विद्वानों का इससे विपरीत मत है उनका कहना है की युद्ध से किसी का लाभ नहीं होता है बल्कि धन हानि जनहानि जैसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं दोनों देश 100 साल पीछे चले जाते हैं जिसमें उन्हें शुरू से सारी चीजें शुरू करनी पड़ती हैं उनकी शिक्षा भवन राशन जीविका के सभी संसाधन उत्पन्न करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है छोटे राष्ट्र पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं वहां भुखमरी कल जाती है जिससे जनता अकाल के मुंह में चली जाती हैं ऐसी स्थिति उत्पन्न ना हो इसलिए लोग युद्ध नहीं करना चाहते हैं क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध का उदाहरण सभी के सामने है
द्वितीय विश्व यद्ध के दौरान जर्मनी में कृत्रिम रबड़ कृत्रिम रेशे कृत्रिम खाद कृत्रिम पेट्रोल आदि का निर्माण वृहद स्तर पर कर लिया था यह उसके लिए उपलब्धि थी लेकिन युद्ध तो जीत नहीं सका युद्ध जीतने के लिए उनमें साहस बहुत था लेकिन युद्ध की नीति भी कहीं ना कहीं अपना रोल निभाती है
अगर लाभ देखा जाए तो अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बहुत सारे वैज्ञानिक जिनकी संख्या 30,000 तथा टेक्नोलॉजी की सेवाएं का उत्पादन कर लिया था या शामिल कर लिया था इसीलिए परमाणु बम का आविष्कार हो सका तो युद्ध की स्थिति कभी-कभी कुछ नए अविष्कार कर देती है जिससे शांति की व्यवस्था की जा सके अमेरिका परमाणु बम को शांति का प्रतीक मानता है वह कहता है कि मैं इसका उपयोग शांति के लिए करता हूं
शांति और विकास एक दूसरे के पूरक है जहां शांति नहीं है वहां किसी उद्योग का विकास होना संभव नहीं है बहुत साल पहले हॉन्ग कोंग जोकि ब्रिटेन के अधीन था वहां पर उद्योग बहुत अच्छे से चल रहे थे लेकिन जब ब्रिटेन ने उसे आजाद किया तो चीन ने उस पर कब्जा कर लिया जिसके कारण वहां चल रहा है उद्योगों के मालिक वहां से भाग गए क्योंकि चीन की बर्बरता से सभी लोग परेशान थे लेकिन इसका फायदा यूएई ने उठाया उसने वहां के उद्योगपतियों को अपने यहां बुला कर जमीन पेट्रोल कच्चे माल सब वस्तुओं का उपलब्ध करवाया जिससे वह 25 साल में इतना विकसित हो गया कि आज वहां लोग जाकर घूमना पसंद करते हैं उसने अपने यहां इतने रूल रेगुलेशन लगाए कि वहां का नियम कानून तोड़ने वाले को सख्त सजा होती है अपना शरिया कानून लागू किया जिससे वहां कोई भी किसी तरह का विद्रोह उत्पन्न ना कर सके बुर्ज खलीफा जैसी इमारत विश्व में कहीं नहीं है केवल यूएई में जो आसमान से देखने पर भी दिखाई देती है
निष्कर्ष यह है कि युद्ध की स्थिति कभी भी उद्योगों को बढ़ावा नहीं देती केवल उन्हीं के उद्योगों को बढ़ावा देती है जो देश केवल और केवल रक्षा उत्पादन करते हैं क्योंकि युद्ध उन्हीं का बाजार है और बाजार में केवल युद्ध का समान ही नहीं दिखता है लोगों की जरूरतों का सामान भी दिखता है जो केवल शांति काल में ही संभव है इसलिए शांति की व्यवस्था के लिए हमें सैन संधि करनी चाहिए जिससे अन्य देश से युद्ध की स्थिति उत्पन्न ना कर सके


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