BA दशराज्ञ युद्ध
वैदिक युद्ध का एक महत्वपूर्ण युद्ध दशराज्ञ के युद्ध के नाम से प्रसिद्ध हैl या युद्ध रावी नदी के तट पर लड़ा गया जैसे पुरुषणड़ी नदी भी कहा जाता है इस युद्ध में भरत कुल के आर्य तथा पुरु कुल के आर्य में वैमनस्य था वैदिक काल में भारत की रहने वाली जातियां अनेकों लो एवं जातियों में अलग-थलग रह रही थी प्रत्येक जातियां अपने कुल की और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए शक्ति अर्जित कर रही थी जिसमें उन्हें कभी कभी युद्ध भी करना पड़ता था एक समय ऐसा आया जब यह जातियां स्थाई रूप से अपने समाज की स्थापना कर लिया तब इन्होंने अपने क्षेत्र का विस्तार करना शुरू किया जिसके कारण अनेक कुल या जातियों के प्रादेशिक राज्यों की स्थापना की गई
जब राजा अपने क्षेत्र का विस्तार करने लगे तब आर्य तथा अनार्य राजाओं के बीच संघर्ष उत्पन्न हुआ तथा जो आर्य थे और अनेक आर्य के बीच युद्ध प्रारंभ हो गया कहा जाता है कि संघर्षों का मूल कारण दो राज पुरोहितों वशिष्ठ एवं विश्वामित्र के आपसी वैमनस्य एवं संघर्ष ही कारण था गुरु विश्वामित्र ने गुरु वशिष्ठ से बदला लेने के लिए 10 आर्य राजाओं का एक संघ बनाकर , राजा सुदास पर आक्रमण की योजना तैयार की तथा युद्ध करा दियाl


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