MA4 economic system

जब से अर्थशास्त्र विषय का उपयुक्त रूप से अध्ययन प्रारंभ हुआ है और आज के समय तक हमें तीन प्रकार की अर्थव्यवस्था दिखाई पड़ती है 
1.पूंजीवादी अर्थव्यवस्था 
2.साम्यवादी अर्थव्यवस्था 
3.मिश्रित अर्थव्यवस्था

1. पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की जड़ें आर्थिक स्वतंत्रता पर आधारित हैं जिसके अंतर्गत व्यक्ति के आर्थिक क्रियाओं पर सरकारी हस्तक्षेप का अभाव पाया जाता है इस विचारधारा के प्रमुख समर्थक अर्थशास्त्री एडम स्मिथ डेविड रिकार्डो और माल्थस रहे हैं एडम स्मिथ व्यक्ति की स्वतंत्रता और उसके आर्थिक क्रियाकलापों में सरकार द्वारा किसी प्रकार का हस्तक्षेप अस्वीकार करते थे उनके अनुसार मनुष्य के अंदर आर्थिक संपत्ति अर्जित करने की एक नैसर्गिक प्रवृत्ति होती है जो कि आर्थिक विकास के लिए बहुत उपयोगी होता है किंतु एडम स्मिथ में कुछ ऐसे उद्योगों पर सरकारी नियंत्रण की भी वकालत की है जो की रक्षा से संबंधित हो इन अर्थशास्त्रियों के विचारों की कारण अमेरिका का स्वतंत्रता आंदोलन फ्रांस की क्रांति और उसी समय औद्योगिक क्रांति का जन्म हुआ औद्योगिक क्रांति के कारण यूरोप के लोगों के आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक जीवन में विशेष परिवर्तन आया औद्योगिक क्रांति के कारण लघु उद्योग समाप्त होने लगे और बड़े बड़े कारखानों का निर्माण होने लगा और उद्योग ग्रामीण क्षेत्र से हटकर शहरी क्षेत्रों में स्थापित होने लगे जिसके परिणाम स्वरूप वेतन भोगी कर्मचारियों का जन्म होने लगा और उपभोक्ता चरित्र में परिवर्तन आने लगा उद्योगों को चलाने के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता होने लगी और बड़े पैमाने पर उपभोग की वस्तुएं बनने लगी और इस प्रकार उत्पादित वस्तुओं के लिए नए बाजारों की खोज प्रारंभ हो गई है इस प्रकार की पूंजीवादी व्यवस्था कई 100 वर्षों तक यूरोप में प्रभावी रही और विश्व में उनका व्यापार फैलने लगा क्योंकि पूंजीवादी मूल रूप से व्यक्तियों के लाभ उद्योग पर आधारित था अतः कर्मचारियों का शोषण कम वेतन देकर अधिक कार्य लेने की प्रवृत्ति बलवती होने लगी फलता पूंजीवाद के विरुद्ध आम जनित असंतोष का जन्म हुआ
2. साम्यवादी अर्थव्यवस्था व्यक्तिवादी पूंजीवादी और स्वतंत्र व्यापार के सिद्धांत से जन्म लेने वाली अर्थव्यवस्था में मजदूरों के शोषण की प्रवृत्ति बलवती होने लगी जिसका विरोध करने के लिए साम्यवादी विचारधारा का जन्म हुआ जिसके प्रमुख प्रवर्तक कार्ल मार्क्स थे कार्ल मार्क्स को जन क्रांति का जनक कहा जाता है जिसका लक्ष्य मजदूर वर्ग एवं दबे कुचले लोगों के जीवन की रक्षा करना था उन्होंने कार्मिक वर्ग साम्यवाद का दिशा निर्देशन किया और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था और अंग्रेजी उद्योग वाद के खिलाफ ट्रेड यूनियन के संघर्ष को प्रोत्साहित किया उनका सिद्धांत इस बात पर आधारित था कि वस्तुओं के उत्पादन में पूंजीवादी पूंजी लगाता है किंतु श्रमिक अपना श्रम लगाता है अतः श्रम और पूंजी दोनों मिलकर वस्तुओं का उत्पादन करते हैं अतः उत्पादन में दोनों किए थे दारी समान होती है और लाभ में उसी प्रकार का वितरण होना चाहिए साम्यवादी अर्थव्यवस्था राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था है जबकि पूंजीवादी अर्थव्यवस्था व्यक्ति नियंत्रित अर्थव्यवस्था है
3. मिश्रित अर्थव्यवस्था के अंतर्गत इन दोनों अर्थव्यवस्थाओं का सम्मिलित स्वरूप देखने को मिलता है जिसमें कुछ उद्योग व्यक्तिगत क्षेत्र एवं कुछ उद्योग सरकारी क्षेत्र के होते हैं बीसवीं शताब्दी में मिश्रित अर्थव्यवस्था का अधिक प्रभाव देखने को मिलता है किंतु सन 1991 में सोवियत संघ के विखंडन और पूर्वी यूरोप के साम्यवादी राष्ट्रों का द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्था को हटए जाने के बाद विश्व पुनः नवीन पूंजीवाद की ओर मुड़ रहा है या अग्रसर हो रहा था और WTC के स्थापना के बाद आर्थिक सुधारों की नई प्रवृत्ति प्रारंभ हुई है और तृतीय विश्व के देशों में एवं यूरोप साम्यवादी देशों में सरकारें उद्योग धंधों को निजी पूंजी वादियों के हाथ बेच रहे हैं सूखी तृतीय विश्व के विकासशील अर्थव्यवस्था इस परिवर्तन को सहज रूप से ग्रहण नहीं कर पा रहा है फलता विश्व अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी और बेरोजगारी के दौर से गुजर रही है नए आर्थिक परिवर्तनों में मशीनों के आधुनिकीकरण की प्रवृत्ति बढ़ रही है अतिक्रमण मुक्त अर्थव्यवस्था मशीन उन्मुख अर्थव्यवस्था होती जा रही है रोजगार के अवसर घटने के कारण उपभोक्ता बाजार में मंदी का जबरदस्त और चल रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के कारण स्वदेशी उद्योग भारी कठिनाई और उसका सामना कर रहे हैं आर्थिक आबादी वाले देश जहां पर श्रम उन्मुख व्यवस्था भी उन्हें इस नए आर्थिक दौर में बहुत बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने के कारण उपभोग की वस्तुओं के बाजार भरा पड़ा है किंतु रोजगार के अभाव में आम लोगों की क्रय शक्ति घटती जा रही है अतः सभी अर्थव्यवस्था में आर्थिक मंदी के बोझ तले दब रही हैं

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट